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चिन्ता नहीँ भगवत्चिंतन की आवश्यकता हैँ।

💐|| चिन्ता नहीं भगवत्चिंन्तन की आवश्यकता हैँ 💐 जो होनेवाला है, वह होकर ही रहेगा और जो नहीं होनेवाला है वह कभी नहीं होगा , फिर चिन्ता किस बात की ? तुलसी भरोसे राम के निर्भय होके स...

पढ़िए चिंतन कीजिये।

पढ़िए चिंतन कीजिये । *************************************** 1. जिदंगी मे कभी भी किसी को बेकार मत समझना क्योक़ि बंद पडी घडी भी दिन में दो बार सही समय बताती है। ************************************** 2. किसी की बुराई तलाश करने वाले इंसान की मिसाल उ...

भगवान हमे प्यारे क्यों नहीँ लगते ?

सत्संग-प्रसंग पर एक जिज्ञासु भक्त ने एक संत से प्रश्न कियाः "महाराज जी ! कृपा करके बताएँ कि त्रिभुवन विमोहन  होने पर भी भगवान हमें प्यारे क्यों नहीं लगते ?" संत ने कहा;- देखो ! श्...

सन्तवाणी।

श्रद्धेय स्वामीजी श्रीशरणानंदजी महाराज अनावश्यक कार्य वही है, जिसका सम्बन्ध वर्तमानसे न हो और जिसमें साधककी सामर्थ्य तथा विवेकका समर्थन न हो । जिसका सम्बन्ध वर्तमानस...

श्री कृष्ण और बहते दिये।

श्रीकृष्ण और बहते दीये 🌼कार्तिक महीने में दीप-दान का चलन है। सभी माताएँ कार्तिक में नदी में दीप बहाती हैं। मैया यशोदा भी दीप-दान के लिए तैयार हुई। कन्हैया ने उन्हें देख लि...

कमी में भी गुण देखना।

🌞🌞 💎 कमी में भी गुण देखना💎 👉बहुत  समय  पहले  की  बात  है  , किसी  गाँव  में  एक   किसान  रहता  था . वह  रोज़   भोर  में  उठकर  दूर  झरनों  से  स्वच्छ  पानी  लेने  जाया   करता  थ...

अठारहवें अध्याय का माहात्म्य।

अठारहवें अध्याय के माहात्म्य का वर्णन। श्रीमहादेवजी न कहाः गिरिनन्दिनी ! चिन्मय आनन्द की धारा बहाने वाले अठारहवें अध्याय के पावन माहात्म्य को जो वेद से भी उत्तम है, श्रव...