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Showing posts with the label श्रीकृष्ण

मधुर बाल लीला ।

अनेक दिव्य-दिव्य ठाकुर जी की बाल लीलाए है । मेरे प्रभु एक दिन तो अपने बाबा नन्द की गोद में बैठकर भोजन कर रहे है , ये बड़ी मधुर लीला है ।       अपने बाबा नन्द की गोद में बैठकर ठाकुर ...

श्री जी कृपा

मन्दिर श्रीश्रीराधाविनोदजी जमाई-ठाकुर श्रीजमाई-ठाकुर व तराश वालेh मन्दिर नाम से प्रसिद्ध श्रीश्रीराधाविन ोदजी का अति सुन्दर मन्दिर मथुरा रोड पर अवस्थित है। तरास स्ट...

एक राजा

किसी राजा के पास एक बकरा था । एक बार उसने एलान किया की जो कोई इस बकरे को जंगल में चराकर तृप्त करेगा मैं उसे आधा राज्य दे दूंगा। किंतु बकरे का पेट पूरा भरा है या नहीं इसकी परीक्...

गोवेर्धन पर्वत की परिक्रमा क्यों ?

*गोवेर्धन पर्वत की पारिक्रमा क्यों?--* . *श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को भगवान का रूप बताया है और उसी की पूजा करने के लिए सभी को प्रेरित किया था।* *आज भी गोवर्धन पर्वत चमत्कारी है ...

श्री कृष्ण और अर्जुन

एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन भ्रमण पर निकले तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राहमण को भिक्षा मागते देखा.... अर्जुन को उस पर दया आ गयी और उन्होंने उस ब्राहमण को स्वर्ण मुद्राओ ...

परहित।

     प्रश्न-परहित का भाव होने में बाधा क्या है ?      उत्तर-व्यक्तिगत स्वार्थ ही बाधक है । वास्तव में व्यक्तिगत स्वार्थ का भाव रखने से स्वार्थ सिद्ध नहीं होता, पर सबके हित का ...