Skip to main content

Posts

Showing posts with the label श्री

जगन्नाथ

श्रीराधारमणाय समर्पणं . श्रीजगन्नाथ पुरी से दस कोस दूर पीपलीचटी ग्राम में रघु केवट का घर था। . घर में स्त्री और बूढ़ी माता थी। प्रातः जाल लेकर रघु मछलियां पकड़ने जाता और पक...

केवट की कथा।

क्षीरसागर का कछुवा . क्षीरसागर में भगवान विष्णु शेष शैया पर विश्राम कर रहे हैं और लक्ष्मी जी उनके पैर दबा रही हैं। विष्णु जी के एक पैर का अंगूठा शैया के बाहर आ गया और लहरें उस...

मधुर बाल लीला ।

अनेक दिव्य-दिव्य ठाकुर जी की बाल लीलाए है । मेरे प्रभु एक दिन तो अपने बाबा नन्द की गोद में बैठकर भोजन कर रहे है , ये बड़ी मधुर लीला है ।       अपने बाबा नन्द की गोद में बैठकर ठाकुर ...

प्रभु के हाथ माँ को अर्पित।

.लगभग एक हजार वर्ष पूर्व झांसी उत्तर प्रदेश में श्री रामशाह प्रतिष्ठित तेल व्यापारी थे| वे एक समाज सुधारक, दयालु, धर्मात्मा एवं परोपकारी व्यक्ति थे| . उनकी पत्नी को शुभ नक्ष...